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2007-10-13 秋も一箱古本市! その2

[]一箱古本市 当日 20:54

4:30 起床

5:30 出発

6:42 新幹線ひかり号出発進行

8:30 アキバ着。

10:00 集合時間に余裕で到着

11:00 〜 17:00 一箱古本市開店

上り新幹線自由席は満席。坊主たちとは離れた車両になるが、仕方ない。座れただけましだ。

ふと見ると足元にコンセントZERO-3[es]充電!

んでひたすら豆本を折る。本屋さんのカバーではなく、お菓子の包装紙を使った。

準備期間が足りないため、売り物の本を事前に梱包して、宅配で送れず、家から持って行くが、これが重いのなんの。

カゴの中身は風呂敷できっちり包み、持ち手は外に出してカートに載せる。

駅の階段などは、持ち手を使って提げる。腰に当たる部分が思いのほか痛いので、予備の風呂敷をあてがう。

東京駅など大きな駅ではエスカレーターがあり、ベビーカーの要領で載せられるからいいのだが、地下鉄千駄木駅の階段は往生した。

ヒラ積みできっちり詰めた本を、少しずつ90度立てて並べ、いざ開店

まずは清岡卓行詩集の署名本から売れていく。

なんせ100円だから……。

2組めのお客さんに、おまけの折り紙豆本差し上げると「あ、これ田中栞さんに折り方教わった」という声が頭上から……。

田中さんをご存知なんですか?」

「あ、はい……。『退屈』ですぅ」

きゃあ〜! 退屈男さんだわ! きゃいきゃい。

今回は、店番要員として長男次男も連れて行ったのだが、彼らにまかせてまで他会場へ行こうという気にはなかなかなれないまま、ずうっとライオンズマンションにいた。

昼過ぎに、まさかのご来店。

去年、岡崎小唄の3番以降の歌詞調査の依頼を受けたS野さんが!

「あんたね、去年、コピーを送ってくれた封筒が○崎高校の封筒になっとったけど……」と不思議がっておられたので、その事情をご説明。

すると何たる偶然か、M保先生の従兄弟であられる由。

あら、まあ! びっくりですわん。

閉店後、全会場制覇=しおり集めラリーの秘密の景品が、しのばずくんカラー印刷のブックカバーだと判明。

当然いただきました。

打上げイベントは失礼して、アキバ三昧。

坊主たちは【戦場の絆】デビューにおおはしゃぎ。

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